आप सभी का 'Shivendra Kumar Mehta' ब्लॉग बेवसाइट पर स्वागत है। कबीर साहब का वचन है- "सुकिरत करि ले नाम सुमिरि ले को जानै कल की। जगत में खबर नहीं पल की।।" इसलिए 'शुभस्य शीध्रम' किजिए। जीवन में सुख-दुःख लगा ही रहता है, इसे प्रभु का प्रसाद मानें। अपना काम (जीविकोपार्जन कार्य), ईश्वर भक्ति और शुभ कर्म करते रहें। यहाँ पर आप जो कुछ भी पढेंगे और सुनेंगे उसे दूसरों के साथ शेयर किजिए। जय गुरु महाराज।🙏 E-mail: maharshimehisewatrust@gmail.com
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महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
🌼 नारी का सम्मान – सृष्टि का अभिमान 🌼 ✍🏻 शिवेन्द्र वह सृजन की धरती है, आशा की किरण। संघर्ष की देवी है, शक्ति की शरण।। स्नेह की गंगा है, म...
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रामचरितमानस-सार सटीक प्रथम सोपान, बालकाण्ड बंदऊँ गुरु पद-कंज, कृपा-सिंधु नर-रुप हरि। महामोह तमपुंज, जासु बचन रबि कर निकर।। (कृपा के समुद्...
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साधकों के लिए आवश्यक है, सादगी और सरलता। प्रतिष्ठा की चाह उनमें नहीं होनी चाहिए। काक न सोहत पाक पर, हंस सजे सर तीर। "नीच न ...
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पापकर्म मत करो | शुभ-कर्म में ना देरी करो। हमारा मानवतन कर्म प्रधान है। प्रत्येक मानव अपने कर्म फल के अनुरूप ही सुख-दुख भोगता है। और हमार...
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