🌼 नारी का सम्मान – सृष्टि का अभिमान 🌼
✍🏻 शिवेन्द्र
वह सृजन की धरती है, आशा की किरण।
संघर्ष की देवी है, शक्ति की शरण।।
स्नेह की गंगा है, ममता की खान।
सपनों की राह में रौशन आसमान।।
नारी के बिना यह जग अधूरा।
जैसे दीप बिना प्रकाश है अधूरा।।
वह माँ है, बहन है, प्रेम की पहचान।
करुणा की मूरत, धैर्य की जान।।
नारी है सृष्टि की अनुपम कहानी।
प्रकृति ने जिसकी रची निशानी।।
स्नेह की गंगा, ममता की धारा।
संघर्ष की देवी, शक्ति न्यारा।।
जब-जब धरा पर संकट आया।
नारी ने साहस का दीप जलाया।।
कभी दुर्गा, कभी काली बनकर।
अन्याय से वह लड़ी खुलकर।।
वह सृजन की धरती, आशा की किरण।
धैर्य की मूर्ति, प्रेम की शरण।।
हर आँधी से वह टकरा जाती।
अपनी शक्ति खुद पहचान जाती।।
त्याग में जिसकी कोई सानी नहीं।
सहनशीलता की वह कहानी नहीं।।
जो दुनिया की हर जंजीर तोड़ दे।
अपने अस्तित्व को ऊँचाइयाँ जोड़ दे।।
वह नर्म भी है, वह गर्म भी है।
शीतल बयार, वह अग्नि धर्म भी है।।
जो चाहे, वह कर सकती है।
समय से पहले सूरज भर सकती है।।
हर रिश्ते को वह प्यार से सींचती।
अपनी परछाईं तक दूसरों को बाँटती।।
कभी लक्ष्मीबाई, कभी मीरा बन जाए।
सीता की तरह हर दुख सह जाए।।
तो क्यों न उसे सम्मान मिले।
हर हृदय में उसका स्थान मिले।।
शिवेन्द्र कहें, यह सत्य महान।
नारी ही जीवन, नारी ही प्राण।।
"जहाँ नारी की होगी पूजा,
वहीं खिलेगा सुखमय दूजा।"
सभी महिलाओं को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!🙏
💐 नमन है उन नारियों को, जो इस जगत की असली प्रेरणा हैं! 💐
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