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रैन जागि कर ध्यान | कार्य में सफलता के लिए अनिवार्य है | किसी कार्य की सफ़लता के लिए किन पाँच चीज़ों की आवश्यकता होती है?


किसी कार्य की सफ़लता के लिए किन पाँच चीज़ों की आवश्यकता होती है? जानें!
रैन जागि कर ध्यान | भाग-1 
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण का वचन है कि किसी कार्य की सफलता के लिए पाँच चीजों की आवश्यकता होती है- कर्ता, क्षेत्र, साधन, क्रिया और अज्ञात। 

कर्ता अयोग्य हो और क्षेत्र अनुकूल हो, तो सफलता नहीं मिलेगी। कर्ता योग्य हो और क्षेत्र अनुकूल नहीं हो, तो सफलता नहीं मिलेगी। कर्ता योग्य हो, क्षेत्र अनुकूल हो, किन्तु साधनविहीन हो, तो सफलता नहीं मिलेगी। कर्ता योग्य हो, क्षेत्र अनुकूल हो, साधन संपन्न हो, किन्तु कार्यान्वयन नहीं कर रहा हो, तो भी सफलता नहीं मिलेगी। कर्ता योग्य हो, क्षेत्र अनुकूल हो, साधन संपन्न हो और कार्यान्वयन भी कर रहा हो, तब पाँचवी चीज है- अज्ञात अर्थात प्रभु-कृपा, वह मिल जाती है; फलत: सफलता मुट्ठी में आ जाती है।
पहली बात है कि कर्ता का योग्य होना अनिवार्य है।

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