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साधन जानना और करना नहीं, पुण्य तो हुआ; लेकिन पूरा नहीं | महर्षि मेँहीँ | Maharshi Mehi


साधन जानना और करना नहीं, पुण्य तो हुआ; लेकिन पूरा नहीं |
आपलोगों को जो दीक्षा मिली है, उसे सत्य समझिए। 

केवल सत्य समझ कर संतुष्ट नहीं हो जाइए, उसे काम में लाइए। 

यानी साधन-भजन कीजिए। साधन जानना और करना नहीं, पुण्य तो हुआ; लेकिन पूरा नहीं।




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